NIA की स्पेशल कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट मामले मे सभी आरोपियों को बरी कर दिया है । इसमे भाजपा के पूर्व संसद साध्वी प्रज्ञा ,कर्नल पुरोहित ,रमेश उपाध्याय (मेजर रिटायर्ड ) ,सुधाकर चतुर्वेदी ,अजय रहिरकर ,सुधाकर दर द्विवेदी ,और समीर कुलकर्णी शामिल थे। इस फैसले पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा यह सनातन की जीत है और दोषियों को भगवान सजा देंगे वहीं दूसरे ओर पीड़ित पक्ष के वकील शाहिद नवीन अंसारी ने कहा हम की इस फैसले के विरुद्ध हाईकोर्ट मे अपील करेंगे।
क्या था मालेगांव ब्लास्ट ?
29 सितंबर , 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव मे बम बिस्फोट हुआ था जिसमे 6 लोग की जान गई और लगभग 95 लोग घायल हुई । यह घटना मुस्लिम इलाके मे हुई जहा बगल मे ही मस्जिद था। मस्जिद के नजदीक मे बाइक परआरडीएक्स रखा था जो की बिसफोट का वजह बना । इस घटना की शुरुआती जांच महाराष्ट्र ATS कर रही थी लेकिन 2011 मे केंद्र सरकार ने इसको NIA को सौंप दिया । इस मामले मे 7 लोगों को आरोपी बनाया गया, इन पर आईपीसी ,UAPA,आर्म्स ऐक्ट के तहत धराये शामिल थी । इस मामले शुरुआती जांच मे लगा की हिन्दू संस्थान – राष्ट्रीय जागरण मंच , शरद सर्वज्ञ पीठ, अभिनव भारत और और हिन्दू राष्ट्र सेना की भूमिका संदिग्ध हो सकता है । 24 ऑक्टूबर 2008 को तीन लोगों को हिरासत मे लिया गया जिनमे साध्वी प्रज्ञा भी शामिल थी। आरोपियों पर इसमे साध्वी प्रज्ञा पर आरोप था की इनके बाइक का इस्तेमाल बिसफोट के लिए हुआ है और कर्नल पुरोहित ने अपने कश्मीर पोस्टिंग से आरडीएक्स लाया जिसका इस्तेमाल बम बनाने के लिए किया गया । इस मामले ने देश की तत्कालीन राजनीति मे बहुत बड़ा मुद्दा बना रहा और काँग्रेस नेताओं इसे भगवा आतंकवाद से जोड़ा।
कोर्ट ने क्या कहा
- बाइक साध्वी प्रज्ञा की है यह साबित नहीं हो पाया ।
- बाइक का चेसिस और इंजन नंबर रिकवर नहीं हो पाया ।
- आरडीएक्स और बम का सबूत नहीं हो पाया ।
- आरडीएक्स कर्नल पुरोहित लाए ये साबित नहीं हो पाया ।
- स्पॉट पंचनामा से कुछ कुछ सामने नहीं आया ।
- आरोपियों के खिलाफ प्रयाप्त साक्ष्य नहीं।
