रूस ने अपने आप को परमाणु मिसाईल ट्रीटी से अलग किया , अमेरिका और रूस मे बढ़ सकता है तनाव

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रूस ने सोमवार को कहा की वह इंटेरमीडीएट रेंज न्यूक्लियर फोर्स संधि से अपने आप को अलग करता है। रूस ने कहा की यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के उस ट्वीट जिसमे उन्होंने कहा था की 2 न्यूक्लियर सबमरीन रूसी तटों के नजदीक मे तैनात किया जायगा । रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा की यूरोप और एशिया महासागर मे बढ़ते अमेरिकी सैन्य नीतियों ने रूस को इस संधि पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया ।

हालांकि ,अमेरिका इस संधि से वर्ष 2019 मे ही अलग हो चुका है । अमेरिका ने रूस पर यह आरोप लगाया था की रूस संधि के शर्तों को नहीं मान रहा है और बार – बार जानबूझकर इसका उलँघन कर रहा है। इस कारण अमेरिका इस संधि से अपने आप को अलग करता है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा की यह निर्णय अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा इंटर्मीडिएट रेंज हथियारों का विकास और उनके तैनाती की तैयारी यूरोप एवं विश्व के अन्य भागों मे लेने से संबंधित है। मंत्रालय द्वारा इस बात का उल्लेख किया गया की अमेरिका जर्मनी मे अगले साल टाइफून और डार्क ईगल मिसाइल के तैनाती का योजना बना रहा है।

मंत्रालय ने कहा की अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस के नजदीक मे मिसाईल शांति को अस्थिर कर रहें है जो की हमारे देश के सुरक्षा लिए एक प्रत्यक्ष खतरा है और इसका क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भयावह नतीजा होगा जिसमे न्यूक्लियर देश भी शामिल है।

रूस के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान मे सुरक्षा परिषद के उप अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने इस फैसले पर ट्विटर पर लिखा की यह नाटो की रूस विरोधीं नीतियों का नतीजा है और यह एक नई सच्चाई है जिसको हमारे सभी विरोधियों को मानना पड़ेगा ।

इन्टरमिडीएट मिसाइल का रेंज 500 km से लेकर 5500 कम तक होता है। जमीन से मार करने वाली ऐसी सभी मिसाइलों को प्रतिबंधित कर दिया गया । 1970 के दशक मे जब यूरोपिय मिसाईल संकट आया था जब दो महाशक्तियों रूस और अमेरिका ने एक दूसरे के खिलाफ इन्टरमिडीएट न्यूक्लियर मिसाईल तैनात कर दिए थे। जिसके कारण युद्ध की स्थिति आ गई थी।

वर्ष 1987 में तत्कालीन सोवियत संघ और अमेरिका ने एक संधि की जिसके तहत दोनों देश अपने -अपने परमाणु और पारंपरिक जमीन से मार करने वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों जिनका रेंज 500 से 1500 km तक था , को कम एवं नष्ट करने का निर्णय लिया गया । यह पहली बार था जब महाशक्तियों ने अपने हथियारों को पूरी तरह से नष्ट करने पर सहमति जताई । इस संधि के तहत 1 जून ,1991 तक दोनों देशों ने कुल 2692 छोटे, माध्यम और माध्यमिक रेंज के मिसाइल को नष्ट किया।

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