12 अगस्त ,दिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट मे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस मामले को देख रही थी जिसमे सूर्यकांत और जयोमाला बागची न्यायधीश थे। बिहार मे चुनाव आयोग द्वारा क्रियान्वित विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जिसमे 65 लाख मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से काट दिया गया है । इसके अलावा इसमे मे बहुत सी खमिया है जैसे – ड्राफ्ट मतदाता सूची मे जीवित का मृत और मृत को जीवित कर देना ,एक ही आवास मे बहुत से मतदाताओं का पता ,इसके अलावा एक व्यक्ति के पास एक से अधिक मतदान केंद्रों के लिए वोटर कार्ड होना।
देश के विपक्षी पार्टियों के नेताओं -मनोज झा (RJD ),महुआ मोइत्रा (TMC ), के सी वेणुगोपाल (CONGRESS) ,अरविन्द सावंत (SHIVSHENA -U ) ,सरफराज अहमद ( JMM), दीपांकर भट्टाचार्य (CPI-ML ),हरमिंदर सिंह मालिक(SP ) ने बिहार मे चल रहे SIR को लेकर आवेदन दिया था। इसके अलावा एनजीओ ADRऔर सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी इस मामले को लेकर आवेदन दिया था । सभी आवेदनों का एक साथ सुनवाई हो रहा है.
बिहार SIR मे कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं मे से 7.24 करोड़ (91.69%) लोगों ने फार्म भरा है । 22 लाख (2.83%) मृत ,36 लाख(4.59%)दूसरे राज्य मे चले गए और 7 लाख (0.89%) के पास एक से अधिक मतदान केंद्रों के लिए वोटर कार्ड था। ऐसा चुनाव आयोग ने बताया ।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
- न्यायधीश सूर्यकांत ने कहा की यह मामला मुख्य रूप से विश्वास की कमी का लगता है।
- नागरिकता संबंधी प्रावधान का अधिकार संसद को है ,इसमे कोई दो राय नहीं। लेकिन नागरिकता संबंधी कानून बनने के बाद नागरिक को वोटर लिस्ट मे शामिल करना और गैर नागरिक को शामिल नहीं करना ,ये केवल चुनाव आयोग का काम ।
- आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है ,आधार कार्ड ऐक्ट के अनुसार ।
- अगर SIR गलत साबित हुआ तो सितंबर मे भी खारिज करार दिया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा तथ्यों एवं आंकड़ों के साथ तैयार रहिए ,SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या और मृत के और उसके बाद का जानकारी चाहिए अन्य सभी आवश्यक जानकारी के अलावा।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
कपिल सिब्बल का दलील
कपिल सिब्बल ने कहा 12 जीवित मतदाताओं को मृत एक विधानसभा मे और दूसरे मे मृत को जीवित कर दिया गया है ।
1950 के बाद जन्म लेने वाला हर कोई भारतीय ।
जो 2003 मे के मतदाता लिस्ट मे शामिल है उनका भी फार्म भरा गया है और फेल होने पर नाम काट दिया जाएगा ,निवास मे परीवर्तन नहीं हुआ तो भी।
65 लाख मतदाताओं का नाम बिना किसी जांच के काट दिया गया है।
BLO ने अपना काम सही से नहीं किया ।
योगेंद्र यादव का दलील
योगेंद्र यादव ने कहा की SIR मतदाता पुनरीक्षण का मामला नहीं है बल्कि मतदाताओं का नाम काटने का प्रोसेस है । इसमे 1 करोड़ लोगों का नाम कट सकता है । इसमे महिलायें ज्यादा प्रभावित हुई है । 25 लाख पुरुष की तुलना मे 31 लाख महिला वोटरों का नाम कटा है ।
उन्होंने कहा की नागरिकता साबित करना सरकार का काम है लेकिन उलटे ये बोझ नागरिकों पर डाल दिया गया है। इससे गरीब ,वंचित तबका को बड़े पैमाने पर अपने पात्रता को साबित करने मे परेशानी होगी।
बिहार ,जहा पहले 97% वोटर पात्रता था अब घट कर 88% हो गया है ।
देश के इतिहास मे इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ जब चुनाव आयोग ने सभी लोगों से फार्म भरने को कहा।
2003 के पुनरीक्षण मे फार्म या डाक्यमेन्ट जमा करने को नहीं कहा गया ।
बिहार SIR देश का पहला ऐसा प्रक्रिया है जहा वोटर पुनरीक्षण मे एक भी नया मतदाता नहीं जुड़ा ।
उन्होंने दो लोगों को पेश किया जिन्हे वोटर ड्राफ्ट लिस्ट मे मृत करार दिया गया है।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग के तरफ से द्विवेदी ने कहा की SIR मे थोड़ा बहुत कमिया होना स्वाभाविक है। इसको सुधार कर लिया जाएगा । आयोग ने कहा की किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए नहीं काटा जाएगा । उनको दो स्तरों पर अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
11 अगस्त को चुनाव आयोग ने हलफ़नामा दाखिल किया था । आयोग ने कहा की वह कानूनी रूप से काम कर रहा है । ऐसा जरूरी नहीं की जिनका नाम कटा है उनका सूची सार्वजनिक किया जाए। इसके अलावा चुनाव आयोग ने कहा की ड्राफ्ट लिस्ट से छूटे हुए लोगों का अलग से सूची बनाने का कोई नियम नहीं है। और याचिकाकर्ता इसे अधिकार के तौर पे नहीं मांग सकते। कोर्ट को गुमराह करने वाले याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाना चाहिए .
